Thursday, May 14, 2009

मक्खी के दाँत..........

मक्खियों के दाँत नहीं होते. उनके मुँह के भाग कुछ ऐसे होते हैं जो स्पंज की तरह काम करते हैं और भोजन को सोख लेते हैं. इसलिए उनका भोजन तरल होना चाहिए. उनकी जीभ उस स्ट्रॉ जैसी होती है जिससे हम ठंडा पेय पीते हैं. जब मक्खियाँ दूसरे कीड़ों को खाती हैं तो भी उनके भीतरी भाग को चूसती हैं. जब वो हमारे भोजन पर बैठती हैं तो उसपर उलटी करती हैं. इस उलटी में जो पाचक रस, ऐन्ज़ाइम और लार होती है वह उस भोजन को पिघलाती है जिससे मक्खी उसे चूस सके. मक्खी क्योंकि जगह-जगह बैठती है इसलिए उसके कीटाणु उसके मुँह पर चिपक जाते हैं और जब वो भोजन पर उलटी करती है तो वो कीटाणु भी वहाँ पहुँच जाते हैं. इसीलिए ऐसी जगह खाना खाना ख़तरनाक होता है जहाँ मक्खी बैठ रही हों.

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